हिंदी बनेगी “ग्लोबल लैंग्वेज”?

बठिंडा: क्या हिंदी आने वाले समय में अंग्रेज़ी को टक्कर दे पाएगी? क्या डिजिटल युग में हिंदी विश्व संचार की सेतु-भाषा बन सकती है? इन्हीं सवालों पर गहन विमर्श के लिए पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय 14–15 दिसंबर 2025 को एक दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित कर रहा है। इसका विषय है – “विश्व भाषा के रूप में हिंदी : स्थिति और चिंतन”। आयोजन का नेतृत्व विश्वविद्यालय का हिंदी विभाग और राजभाषा कार्यान्वयन समिति कर रहे हैं। आयोजन समिति ने बताया कि इसमें देश-विदेश से ख्यातनाम विद्वान, शोधार्थी और शिक्षाविद भाग लेंगे। संगोष्ठी का उद्देश्य हिंदी की वर्तमान वैश्विक स्थिति का मूल्यांकन करना और भविष्य में इसकी संभावनाओं पर ठोस रणनीति बनाना है।
क्यों खास है यह संगोष्ठी?
हिंदी केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रवासी भारतीय समाज, साहित्य, सिनेमा, पत्रकारिता, शिक्षा और सोशल मीडिया के जरिए विश्व पटल पर मजबूत पहचान बना चुकी है।
सम्मेलन में हिंदी और विदेशी भाषाओं के अंतःसांस्कृतिक संवाद, हिंदी साहित्य के अनुवाद की अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता, डिजिटल युग में हिंदी की भूमिका और रोज़गार-शिक्षा के क्षेत्र में हिंदी की संभावनाएं जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन अनुवाद के संदर्भ में भी हिंदी की स्थिति और भविष्य पर विचार किया जाएगा।
मुख्य उद्देश्य
संगोष्ठी का मक़सद न केवल हिंदी को एक सशक्त और जीवंत भाषा के रूप में स्थापित करना है, बल्कि भारतीय भाषाओं के बीच इसे सेतु-भाषा बनाना भी है। आयोजकों का कहना है कि हिंदी की वैश्विक पहचान को और मजबूत करने के लिए शिक्षा, संस्कृति और तकनीकी क्षेत्र में ठोस कदम उठाने होंगे।
क्या होगा खास?
सत्रों में विशेषज्ञ हिंदी की चुनौतियों और अवसरों पर प्रकाश डालेंगे। कई शोध-पत्र प्रस्तुत किए जाएंगे और उत्कृष्ट शोध-पत्रों को आईएसबीएन युक्त पुस्तक या पीयर-रिव्यू जर्नल में प्रकाशित करने की योजना भी है। यह कदम हिंदी शोध को अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई पहचान देगा।
पंजीकरण और सहभागिता
प्रतिभागियों के लिए ऑनलाइन पंजीकरण अनिवार्य है। शुल्क शिक्षकों के लिए 500 रुपये और शोधार्थियों के लिए 300 रुपये रखा गया है। इच्छुक प्रतिभागी 30 नवंबर तक अपना पूर्ण शोध-पत्र भेज सकते हैं।
हिंदी का बढ़ता दायरा
आज हिंदी सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर तेजी से विस्तार कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में हिंदी शिक्षा और रोजगार की नई संभावनाओं को खोलेगी। यही कारण है कि इस संगोष्ठी को हिंदी को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।



