
एस.एस. खन्ना गर्ल्स डिग्री कॉलेज, प्रयागराजसरोज लालजी मेहरोत्रा विधि अध्ययन केंद्र, एस.एस. खन्ना गर्ल्स डिग्री कॉलेज, प्रयागराज द्वारा 7 अप्रैल 2026 को अपनी चौथी अंतर-महाविद्यालयीय द्विभाषी राजनीतिक-कानूनी वाद-विवाद प्रतियोगिता ‘प्रतिवाद’ का आयोजन किया गया। वाद-विवाद का विषय था— “Right to Recall: Strengthening People’s Sovereignty or Disruption of Electoral Mandate”“जनप्रतिनिधि वापसी का अधिकार: जनसशक्तिकरण का सशक्त सुधार या निर्वाचित जनादेश में व्यवधान।
इस प्रतियोगिता में इलाहाबाद विश्वविद्यालय एवं उसके घटक महाविद्यालयों जैसे सी.एम.पी. डिग्री कॉलेज, ईश्वर शरण डिग्री कॉलेज, इलाहाबाद विश्वविद्यालय का मुख्य परिसर (राजनीति विज्ञान संकाय एवं विधि संकाय) के विद्यार्थियों के साथ-साथ प्रो. राजेंद्र सिंह विश्वविद्यालय (PRSU), प्रयागराज से संबद्ध महाविद्यालयों जैसे शम्भूनाथ इंस्टिट्यूट ऑफ लॉ, पं. सोम चन्द्र द्विवेदी विधि महाविद्यालय, इंस्टिट्यूट ऑफ लॉ एंड सोशल साइंसेज़ तथा बी.बी.एस. इंस्टिट्यूट ऑफ लॉ के विद्यार्थियों ने अपने-अपने महाविद्यालयों का प्रतिनिधित्व किया। प्रतियोगिता की निष्पक्षता बनाए रखने हेतु मेज़बान संस्था, एस.एस. खन्ना गर्ल्स डिग्री कॉलेज ने स्वयं भाग नहीं लिया और केवल आयोजक की भूमिका निभाई।
यह वाद-विवाद प्रतियोगिता दो चरणों में आयोजित की गई—प्रारंभिक चरण तथा अंतिम चरण। प्रारंभिक चरण में पंजीकृत 14 टीमों में से 12 टीमों ने भाग लिया और अंतिम चरण में पहुँचने के लिए प्रतिस्पर्धा की। अंतिम चरण में चयनित 4 टीमों ने विजेता बनने के लिए पुनः प्रतियोगिता की।
प्रारंभिक चरण का मूल्यांकन एस.एस. खन्ना गर्ल्स डिग्री कॉलेज के संकाय सदस्यों द्वारा किया गया। अंतिम चरण के लिए प्रतियोगिता में दो विशिष्ट निर्णायक—प्रो. अंशुमान मिश्रा (विभागाध्यक्ष, विधि संकाय, इलाहाबाद विश्वविद्यालय) तथा सहायक प्रोफेसर डॉ. प्रीतम (राजनीति विज्ञान विभाग, इलाहाबाद विश्वविद्यालय) से उपस्थित रहे।प्रारंभिक चरण का शुभारंभ सुश्री प्राची कुमारी के उद्घाटन भाषण से हुआ, जिसके पश्चात् सुश्री प्रगति राज द्वारा प्रतिभागियों को विषय एवं नियमों से अवगत कराया गया।
चार टीमों के चयन के बाद अंतिम चरण प्रारंभ हुआ, जिसके नियम भी सुश्री प्रगति राज द्वारा बताए गए।समापन सत्र के दौरान प्राचार्या प्रो. ललिमा सिंह ने मुख्य अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया। अपने संबोधन में उन्होंने प्रतिभागियों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के शैक्षणिक प्रयास विद्यार्थियों को विविध दृष्टिकोणों से परिचित कराते हैं, जिससे उनका ज्ञान, समझ एवं विश्लेषण क्षमता विकसित होती है।प्रो. अंशुमान मिश्रा ने विद्यार्थियों की स्पष्टता, गहनता और विश्लेषणात्मक क्षमता की प्रशंसा करते हुए देश के भविष्य के प्रति आशा व्यक्त की।
डॉ. प्रीतम ने भी प्रतिभागियों के उत्साह की सराहना की।प्रतियोगिता के विशिष्ट निर्णायकों को प्राचार्या प्रो. ललिमा सिंह एवं उप-प्राचार्या प्रो. मंजरी शुक्ला द्वारा उपहार एवं पौधों के साथ सम्मानित किया गया। इसके पश्चात् माननीय सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति श्री अरुण टंडन ने अपने संबोधन में कहा कि वाद-विवाद प्रतियोगिता व्यक्ति की बौद्धिक क्षमता की परीक्षा होती है। उन्होंने कहा कि प्रतिवाद (रिबटल) का उत्तर देने की दक्षता किसी व्यक्ति की वैचारिक गहराई और विषय की समझ का महत्वपूर्ण मापदंड है।
इस वाद-विवाद प्रतियोगिता ‘प्रतिवाद’ का समन्वयन सुश्री प्रगति राज द्वारा किया गया। सरोज लालजी मेहरोत्रा विधि अध्ययन केंद्र के छात्र स्वयंसेवकों एवं अन्य संकाय सदस्यों—सुश्री मोहिनी शुक्ला, सुश्री रिया सिन्हा, सुश्री अंशी अग्रवाल, सुश्री प्राची कुमारी, डॉ. अपूर्वा सिंह, सुश्री प्रगति राज, सुश्री शिवांगी शिवी, सुश्री भाग्यश्री मिश्रा, डॉ. श्वे


