
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IIT) में प्रवेश के लिए आयोजित होने वाली प्रतिष्ठित परीक्षा JEE Advanced के पैटर्न में अगले साल से बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। यह बदलाव छात्रों की केवल रटने की क्षमता नहीं, बल्कि उनकी वास्तविक समझ, तार्किक सोच और समस्या समाधान कौशल को परखने पर केंद्रित होगा।
सूत्रों के अनुसार, आईआईटी काउंसिल ने परीक्षा प्रणाली को अधिक आधुनिक, पारदर्शी और छात्र-अनुकूल बनाने के लिए इस नए मॉडल पर काम शुरू कर दिया है। यदि प्रस्तावित बदलाव सफल रहता है, तो 2027 में होने वाली JEE Advanced परीक्षा में इसे लागू किया जा सकता है। यह बदलाव पारंपरिक प्रश्नों से हटकर एक नए एटीट्यूड आधारित प्रारूप को अपनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

नई प्रणाली के तहत प्रश्नों का फोकस छात्रों की मानसिक क्षमता, विश्लेषणात्मक सोच और वास्तविक जीवन की समस्याओं को हल करने की योग्यता पर होगा। यानी अब केवल फॉर्मूले याद करना या रटकर प्रश्न हल करना पर्याप्त नहीं होगा। छात्रों को गहराई से विषय को समझना होगा और उसे विभिन्न परिस्थितियों में लागू करना भी आना चाहिए।
इस बदलाव को लेकर फरवरी में आईआईटी काउंसिल की बैठक में विस्तार से चर्चा की गई थी। इसमें इस बात पर सहमति बनी कि वर्तमान परीक्षा प्रणाली में सुधार की आवश्यकता है ताकि यह बदलते समय और तकनीकी जरूरतों के अनुरूप हो सके। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बदलाव से छात्रों की वास्तविक प्रतिभा सामने आएगी और केवल कोचिंग आधारित तैयारी पर निर्भरता कम होगी।
हालांकि, इस प्रस्ताव को लेकर छात्रों और अभिभावकों के बीच मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग इसे सकारात्मक कदम मान रहे हैं, जबकि कई छात्रों को डर है कि इससे परीक्षा और कठिन हो सकती है। खासकर उन छात्रों के लिए जो पारंपरिक तरीके से तैयारी करते हैं, यह बदलाव चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।

आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. मणिंद्र अग्रवाल ने पहले भी परीक्षा प्रणाली को लेकर चिंता जताई थी और इसे अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया था। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि यह नया मॉडल किस हद तक लागू होता है और इसका छात्रों पर क्या प्रभाव पड़ता है।
कुल मिलाकर, JEE Advanced में प्रस्तावित यह बदलाव भारतीय शिक्षा प्रणाली में एक बड़ा परिवर्तन ला सकता है। आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि यह नया प्रारूप छात्रों के लिए अवसर बनता है या नई चुनौती। फिलहाल, अभ्यर्थियों को सलाह दी जा रही है कि वे केवल रटने की बजाय कॉन्सेप्ट्स की गहरी समझ पर ध्यान दें, क्योंकि भविष्य की परीक्षा इसी दिशा में आगे बढ़ती नजर आ रही है।


