जनसंचार एवं नवीन मीडिया विभाग ने आयोजित किया राष्ट्रीय सेमीनार
जम्मू। केंद्रीय विश्वविद्यालय जम्मू के माननीय कुलपति प्रो. (डॉ.) संजीव जैन के कुशल मार्गदर्शन और संरक्षण में जनसंचार एवं नवीन मीडिया विभाग ने भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद के उत्तर-पश्चिम क्षेत्रीय केंद्र के सहयोग से दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी “भारतीय ज्ञान परंपरा को बढ़ावा देने में मीडिया की भूमिका” का शुभारंभ हुआ। यह संगोष्ठी आर्यभट्ट भवन स्थित स्वामी विवेकानंद सभागार में हाइब्रिड मोड में आयोजित की जा रही है, जिसमें देशभर 80 से अधिक शोधार्थी, मीडियाकर्मी और शिक्षक हिस्सा ले रहे हैं।

कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. यशवंत सिंह ने कहा कि मीडिया हमेशा ही व्यवहार परिवर्तन में अहम भूमिका का निर्वहन किया है। आज सोशल मीडिया की पहुँच और प्रभाविकता से हम सभी परिचित हैं। उन्होंने कहा कि मीडिया भारतीय ज्ञान परंपरा को मुख्य धारा में लाने में अपनी भूमिका का निर्वहन कर सकता है। उन्होंने कहा कि मीडिया आज के समय भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रसार का सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के बाद भारतीय ज्ञान प्रणाली के बढ़ते महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि सोशल मीडिया, वेबिनार और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए इसे युवा पीढ़़ी तक प्रभावी रूप से पहुँचाया जा सकता है।

मुख्य अतिथि पद्मश्री श्री मोहन सिंह सलाथिया ने मातृभाषा, विशेषतः डोगरी भाषा के महत्व पर ज़ोर देते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा का वास्तविक संवहन मातृभाषा के माध्यम से ही संभव है। उन्होंने सोशल मीडिया के बेलगाम स्वरूप पर चिंता व्यक्त करते हुए संतुलित उपयोग की आवश्यकता बताई। उन्होंने पंचतंत्र जैसी परंपराओं का उदाहरण देते हुए बताया कि इस तरह की ज्ञान परंपराएँ पीढ़़ी-दर-पीढ़़ी ज्ञान का हस्तांतरण सुनिश्चित करती हैं।
मुख्य वक्तव्य वरिष्ठ पत्रकार श्री हरबंस नागोके ने दिया। चालीस वर्षों की पत्रकारिता के अनुभव से समृद्ध उनके विचार स्वतः सभी के लिए प्रेरणादायक थे। उन्होंने कहा कि एक सफल पत्रकार के लिए तीन बातें अनिवार्य हैं कभी नहीं थकना, कभी नहीं संकोच करना और अपने काम में कभी ऊब नहीं महसूस करना। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रसार में मीडिया की ज़िम्मेदारी और सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।

संगोष्ठी के संयोजक प्रो. परमवीर सिंह ने बताया कि आज की संगोष्ठी में कुल पाँच तकनीकी सत्र का आयोजन किया गया जिसमें 60 से अधिक शोध पत्रों का वचन देश के अलग-अलग विश्वविद्यालयों के शोधार्थी शिक्षकों एवं मीडिया कर्मियों द्वारा किया गया।
संगोष्ठी के पहले दिन का समापन सह-संयोजक डॉ. उमेश कुमार ने धन्यवाद वक्तव्य से हुआ। उन्होंने ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की भावना को रेखांकित करते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा संपूर्ण विश्व को एक परिवार मानने का संदेश देती है, जो आज के वैश्विक परिप्रेक्ष में अत्यंत प्रासंगिक है। उन्होंने सभी अतिथियों, वक्ताओं, सत्र अध्यक्षों और शोधार्थियों का हृदय से आभार व्यक्त किया। इस कार्यक्रम में जनसंचार एवं नवीन मीडिया विभाग के अध्यक्ष प्रो. अभय एस डी राजपूत शिक्षक पुष्पलता, रशीद अली, हिन्दी विभाग के शिक्षक डॉ. रत्नेश कुमार, डॉ. शशिकांत मिश्र, डॉ. वंदना शर्मा, डॉ. अरविन्द यादव, डॉ. गोपाल कृष्ण शोधार्थी आदित्य नेगी, सुनैना हरित, सुजाता बेहरा, कुमार ऋषिकेश, वाचस्पति दुबे, आरज़ू शर्मा, ऋषभ पाण्डेय एवं जनसंचार विभाग के सभी विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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